रविवार, 28 अक्तूबर 2012

फण्डा बदल गया




     बहुत पुरानी बात नहीं है यही कोई 22-25 वर्ष पहले की बात है उस वक़्त हम बचपन के मज़े ले रहे थे, तब दस्सी-पंजी चलती थी। दस्सी-पंजी यानी दस पैसे और पाँच पैसे का सिक्का.... उन दिनों 5 पैसे का संतरे वाला एक कम्पट(स्वीट कैंडी) मिलता था... तब विदेशी टॉफीकैंडीचाकलेट का इतना चलन नहीं था या हो सकता है मेरी पहुँच में न रहा हो इसलिए मुझे ऐसा लगता है बहरहाल निहायत सामान्य बच्चा होने के कारण वो 5 पैसे वाला कम्पट ही बचपन का पर्याप्त मज़ा दे जाता था। इस लिहाज़ से 5 पैसे का वो सिक्का मेरे लिए बड़ा महत्वपूर्ण था और जिस दिन जेब में अठन्नी हो उस दिन तो खुद को शहंशाह समझता था। उन दिनों मुझे वे रिश्तेदार बड़े प्यारे लगते थे जो घर से विदा लेते वक़्त मुझे अठन्नी दिया करते थे.... जैसा लोग कहते हैं कि सात सुख होते हैं.... मुझे उन दिनों भौतिक सुखो में ख़ास तौर से स्वादिष्ट चीज़ें खाने में ही सातों सुख मिल जाया करते थे।
     मेरी नानी गर्मियों की रात में खुले आसमान के नीचे बड़े प्यार से अपने पास लिटाती थीं। ज़्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं लेकिन बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताया करती थीं। मुझे याद है कि एक बार उन्होंने बताया था कि ''दूसरे के सोने को भी मिट्टी समझना चाहिए और चोरी चाहे पांच पैसे की हो या पांच लाख की चोरी...चोरी होती है और दोनों ही स्थितियों में बराबर पाप लगता है''..... भईया बचपन की बुद्धि, कोमल मन....छप गईं ये सब बातें....मैंने उनकी बातों को अक्षरशः आत्मसात कर लिया और दूसरे के सोने को मिट्टी समझने लगा....लेकिन इधर परिदृश्य में कुछ बदलाव आ गया वो पुराने नानी वाले फंडे थोड़ा संशोधित हो गए हैं और अब मेरे पास अपने नाती पोतों को सुनाने के लिए संशोधित फंडे हैं ...हुआ कुछ यूँ कि पांच पैसे की चोरी तो आज भी चोरी ही है लेकिन पाँच करोड़..पचास करोड़...पाँच हज़ार करोड़ की चोरी माननीय होने का लाइसेंस है.....''जितना बड़ा चोर उतना ही माननीय!!!''
     .......और अब मैं ये सोचता हूँ कि जिस दिन मैंने नानी की बात गाँठ बाँधी उसी दिन मेरे माननीय होने की संभावनाएं जाती रहीं....

8 टिप्‍पणियां:

  1. संस्मरण से निकला बढ़िया कटाक्ष। नानी का फंडा ही सर्वथा सत्य है।

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    1. शुक्रिया देवेन्द्र जी, आपका कहना सही है।

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  2. vaise sach to nani ji ki hi baat hai haan magar hame bhi afsos hai ki aapke manneey hone ki sambhavnayein jaati rahi ,koi nahin agale janam is se bhi bura haal hona hai tab ban jaaiyega ...plz anyatha na le :)

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    1. भावना जी शुक्रिया आपका.... आपकी सद्भावना हेतु आभार..
      अन्यथा लेने का प्रश्न ही नहीं.... नानी के फंडे इस तरह छपे हैं कि मेरे लिए अगले जनम(यदि होता हो) में भी नहीं बदलने वाले।

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  3. ऐसे माननीयों को सड़े अंडों और जूतो के वार भी मिलते हैं -इस बेशर्मी को क्या कहा जाय!

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  4. बढ़िया एवं सारगर्भित पोस्ट...

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