आपकी महफ़िल में पहुँचे हम ज़रा क्या देर से
ग़म नहीं जो मेरे हिस्से एक ख़ाली जाम आया...
मैंने सोचा बज़्म में कोई ऊँची बात कह दूँ
सोचा बहुत, दिल में मुसलसल बस तेरा ही नाम आया....
क़त्ल अरमां हो गए,आप ही के सामने
आप ही कहें, कैसे मेरा क़ातिलों में नाम आया...
यहाँ तक तो ठीक था,अफ़सोस तो ये है फ़क़त
मैयत का भी मेरे ज़िम्मे सारा इंतज़ाम आया
वाह....
प्रत्युत्तर देंहटाएंगए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास
प्रत्युत्तर देंहटाएंसर पर आया भार, मरी प्यार की पास
जय जय !
निर्दोष भाई ...पहले ई कमेन्ट वर्ड वेरिफिकेशन हटाइये .....बहुते दिक्कत होती है !
हटाएंत्रिवेदी जी सदस्य सूची में शामिल होने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया... ब्लॉग पर आपका स्वागत है...
हटाएंकमेन्ट वर्ड वैरिफिकेशन हटा दिया गया है.