शनिवार, 5 नवंबर 2011

'आम' से 'ख़ास' की ओर...


                                

   यदि आप समाज की रेस में ख़ुद को पिछड़ा महसूस करते हैं और अपने 'स्टेटस' को लेकर हीन भावना से ग्रस्त हैं तो आज मैं आपको 'आम' से 'ख़ास' या 'हाई प्रोफाइल' बनने का फ़ार्मूला सुझाता हूँ.... 
  
   सबसे पहले गहन रिसर्च करके एक ऐसे 'बाबा' की खोज करिए जिसके दो-चार सौ एकड़ में फैले 'सर्वसुविधा-संपन्न' आश्रम होंउसके दरबार में तथाकथित 'एलीट क्लास' सलामियाँ ठोंकता होजिसके दर्शन भी एक आम आदमी के लिए आसानी से सुलभ न होंजिसने हम हिन्दुस्तानियों के साथ-साथ गोरों को भी ज्ञान देकर सुखी बनाने का ठेका ले रक्खा हो अर्थात् जिसका ज्ञान बांटने का बढ़िया विश्वस्तरीय नेटवर्क होजो लम्बी-लम्बी हवाई यात्रायें करता होजो '24 X 7' भौतिकता का उपभोग कर भौतिकता से दूर रहने की धुन सुनाता हो.....

 कुल मिलकर एक ऐसा बाबा खोद कर निकालिए जिसके बारे में आपका आस-पड़ोस ज़्यादा न जानता हो, न ही उसके चेले आपके गिर्द हों यदि आप ऐसा नहीं कर सकेंगे तो फ़िर 'ख़ास' बनने में दिक्कतें आएँगी....ऐसा बाबा ढूँढने के बाद बड़े श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ तनमन, "धन" से उसके चेले बन जाइये या कम से कम पूरी दृढ़ता के साथ समाज में ऐसा प्रदर्शित कीजिये और दर्शाइए कि मेरा बाबा सबसे ज़्यादा 'ज़ोरदार' है और जो माल मेरे पास है वो किसी के पास नहीं है अर्थात् मेरा माल 'यूनीक' है, ऐसा करने के लिए अपने घर या किसी नियत स्थल पर साप्ताहिक कैंप लगाकर सत्संग कर अपने 'ख़ास' होने का प्रदर्शन कीजियेसत्संग में प्रोजेक्टर स्क्रीन व अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर 'गुरु जी' द्वारा प्रदत्त 'अद्वितीय ज्ञान' की गंगा बहाइये और लोगों को दिखा दीजिये कि आप न केवल धार्मिक हैं बल्कि 'हाई-टेक' भी हैं

   आपके इस 'बढ़े हुए स्टेटस' को लोग भूल न जाएँ इसके लिए नियमित अंतराल पर 'दुर्लभ ज्ञान-दर्शन' से सराबोर पर्चे, पैम्फ्लेट और कैलेंडर बाँटिये साथ ही मोबाइल-फोन मैसेज करके उनके दैनिक जीवन में ख़लल डालिएदेश के विभिन्न स्थानों पर 'भव्य पाँच सितारा' पांडालों में होने वाले गुरु जी के 'रंगारंग' प्रवचन कार्यक्रमों में शामिल होकर 'दिव्य-ज्ञान' लाभ प्राप्त करने के लिए यथासंभव लम्बी यात्रायें करिए और लगे-हाथ देशाटन का भी आनंद उठाइए और वहाँ से लौट कर वहाँ बताई गई ज्ञान की बातों के साथ-साथ प्रमुख रूप से वहां जाने वाले अपने गुरु भाइयों(या बहनों) की आलीशान गाड़ियों के मॉडल तथा उनके शरीर पर लदे सोने का वज़न बताइए।
  
   अपने घर की अटारी पर 'यूनीक बाबा' का 'यूनीक' झंडा लगाकर अपने ख़ास होने का ऐलान कर अपने 'स्टेटस' का प्रचार कीजिये.....और हाँ! आपके गुरु जी के परिजनों ने कभी उनका जन्मदिवस मनाया हो अथवा न मनाया हो आप ज़रूर पूरे मोहल्ले को आमंत्रित कर उनका जन्मदिन धूमधाम से मनाइए....


       उपरोक्त सुझावों पर अमल करें, इंशाअल्लाह आप ज़रूर 'आम' से 'ख़ास' बन जायेंगे और समाज में अपने 'स्टेटस' की हीन भावना से उबर पायेंगे साथ ही बोनस के रूप में 'धार्मिक', 'संस्कारी', आध्यात्मिकऔर 'बुद्धिजीवीहोने का तमगा भी हासिल करेंगे। इस प्रकार आप सुखी होने की आम परिभाषा के अनुरूप 'सुखी' अनुभव करेंगे और समाज में अपनी बदली हुई स्थिति पर आत्ममुग्ध हो उठेंगे....सावधानी  के तौर पर उन ज्ञान की बातों को भूल कर भी हरगिज़ आत्मसात्  न करें जो आपके गुरूजी ने (भले ही अपनी दुकान चमकाने के लिए) कही हों....यदि आप ऐसा करेंगे तो अपने मूल उद्देश्य से भटक जायेंगे और 'स्टेटस'  'पोजीशन' की बातें बेमानी हो जाएँगी....
       
   ऐसा करने में घर के कुछ ज़ेवर बिक जाएँ या घर की कुछ आवश्यक आवश्यकताओं में कटौती हो जाए तो भी यह कोई बुरा सौदा नहीं है.....अब जाइये और इस 'धर्म प्रधान', 'अधर्मी समाज' में अपनी नई पोजीशन का लुत्फ़ उठाइए...

       वैसे मैं भी आज-कल दिमाग़ी अशांति के दौर से गुज़र रहा हूँ और कोई गुरु करना चाहता हूँ, अगर आपकी नज़र में कोई सस्ता-मद्दा, टिकाऊ, 'बाबा' हो तो ज़रूर बताइयेगाध्यान रहे मेरी affordability ज़रा कम हैग़रीब स्कूल मास्टर जो ठहरा और मेरी श्रीमती जी के पास जो भी दो-एक ज़ेवर हैं, वे उन्हें मेरी दिमाग़ी शांति से ज़्यादा प्रिय हैं..

2 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut shandar vyangya likhaa hai apne nirdosh ji ..ise aap Jansandesh times ke vyangyalok stambh ke liye bhejiye..vo ise avashya prakashit karenge.
    Hemant

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  2. बहुत ही अच्छी व्याख्या की है सर आपने आत्मज्ञान और वैभव प्राप्त करने की जो भी इन सारे नियमों का पालन करेगा सफलता उसके कदम चूमेगी और कुछ ही दिनों मे "आम" से "खास" हो जायेगा।
    जय हो बाबा की।।।

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