शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

हम ग़रीब मुल्क़ वाले


हम एक ग़रीब मुल्क़ के वासी हैं 
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हमारे पास दुनिया का सबसे वज़नदार संविधान है।

यहाँ नारियाँ पाशविक कृत्यों का शिकार बनती हैं।

यहाँ नारियों की पूजा (पता नहीं कहाँ) होती है और देवता(अपनी ड्यूटी छोड़), जो नारियाँ पूजन-अर्चन किये जाने से वंचित हैं, उनकी देख-रेख करने के बजाय, पूजन स्थल पर रमण करते हैं।

शासन-प्रशासन पूजन स्थल और उन देवताओं को ढूंढकर लड्डू-बर्फी का भोग लगाता है।

देवताओं का आशीर्वाद प्राप्तकर, मुतमईन शासन, मुल्क़ के ''विकास'' की योजनायें बनाता है।

अपराध की नगण्य सम्भावना को दृष्टिगत रखते हुए योजनाओं में ''रामराज'' की परिकल्पना परिलक्षित होती है।

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काया की नश्वरता'' के सिद्धांत के आधार पर जीवित काया की सुरक्षा के स्थान पर पत्थर के ढाँचोंमूर्तियों और मूर्ति बनने की सम्भावना रखने वाले ज़िन्दा इंसानों की ''क़ानूनन'' सुरक्षा पूरी शिद्दत के साथ की जाती है।

हम रोज़ाना 32 रूपए से ज़्यादा कमाकर गर्व से सीना फुलाए घूमते हैं।

हम भोजन को सूंघ कर भी ज़िन्दा रह लेते हैं इसलिए हमारे परिवार के 5 लोग मात्र 600 रूपए में हँसी-ख़ुशी गुज़ारा कर लेते हैं। दुनिया में यह जादू सिर्फ़ हमें ही आता है। 

ग़रीबी के कारण- 
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हमारे पास फोरेंसिक विशेषज्ञों का नितांत अभाव है।
हमारे पास फोरेंसिक प्रयोगशालाओं का नितांत अभाव है।
हमारे पास उचित योग्यताधारी पुलिस बल का बेहद अभाव है।
निगरानी कैमरों(CCTV) की नगण्य संख्या है। 
न्यायालय और न्यायाधीशों का अभाव है।
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का अभाव है।
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का अभाव है।
..................... का अभाव है।
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का अभाव है।

फ़िर भी-
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हमारे पास करोड़ों-अरबों की लागत से बने पत्थर के शानदार पार्क हैं।

हमारे पास पौराणिक पात्रों के आकार से भी बड़ी ज़िन्दा लोगों की मूर्तियाँ हैं, 
यहाँ तक कि जानवरों की भी विशालकाय मूर्तियाँ हैं।

हज़ारों करोड़ की लागत से बना विश्वस्तरीय कार दौड़ाने का ट्रैक है।

सभी के हाथ में निःशुल्क मोबाइल देने की योजनायें हैं।

निःशुल्क टेबलेट और लैपटॉप बाँटने की योजनायें हैं।

बेरोज़गारों(?) को नाकारेपन का मानदेय दिए जाने की योजनायें हैं।
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आज़ाद मुल्क़ में हम ग़रीबों की गाढ़ी कमाई, हमारे द्वारा चुनी गई सरकार द्वारा उनकी मन-मर्ज़ी से मनमाने तरीक़े से ख़र्च करने की पूरी आज़ादी है।

मेरा भारत महान .........

5 टिप्‍पणियां:

  1. आज़ाद मुल्क़ में हम ग़रीबों की गाढ़ी कमाई, हमारे द्वारा चुनी गई सरकार द्वारा उनकी मन-मर्ज़ी से मनमाने तरीक़े से ख़र्च करने की पूरी आज़ादी है।

    ..यही तो सबसे बड़ी बिडम्बना है ..
    काश यह बात आम आदमी समझ सकता!

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  2. धारदार लेख ... इसी विडम्बना में जी रहे हैं ।

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